
10 सितंबर से पितृ पक्ष यानि कि श्राद्ध शुरू हो रहे है, श्राद्ध को परिवार के व्यक्ति को किस प्रकार करना चाहिए इसके संबंध में विस्तृत जानकारी दे रहे है प. सर्विंद दीक्षित..
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👉पिता का पिण्ड दान और जल-तर्पण पुत्र को करना चाहिए. अगर पुत्र न हो तो पोता या पत्नी और पत्नी न हो तो भाई- भतीजे भी श्राद्ध कर /करवा सकते हैं.
👉शास्त्रों के अनुसार पितरों के निमित्त तर्पण करने का पहला अधिकार बड़े पुत्र का होता है
👉मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अगर किसी व्यक्ति का पुत्र न हो तो उसकी बेटी का बेटा यानी की उसका नवासा भी तर्पण कर/करवा सकता है.
👉बेटा न हो तो सास-ससूर का पिंडदान बहू भी कर /करवा सकती है. उसी तरह ससुर का श्राद्ध दामाद भी तब कर /करवा सकता है जब उनका कोई पुत्र न हो.
👉बेटी की शादी न हुई हो तो उसे भी अपने माता पिता का श्राद्ध करने /कराने का अधिकार है.
कुल का कोई सदस्य न बचा हो तो ऐसे हालात में उनका तर्पण कुल के पुरोहित भी कर/करा सकते हैं.
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👉शास्त्रों के अनुसार कुतप वेला में पितरों का पिंड दान करना चाहिए. तर्पण करते वक्त कुशा और काले तिल का उपयोग जरूर करें
👉जनेऊ धारण करने वाले जल तर्पण करते वक्त यज्ञोपवीत को बाएं की बजाय दाएं कंधे पर रखें. श्राद्ध कर्म में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित है.
👉पितृपक्ष में सात्विक भोजन करें. ध्यान रहे इन 16 दिन में घर में लड़ाई-झगड़ा, कलह न हो. ऐसा करने से तर्पण सफल नहीं माना जाता
👉पितृपक्ष के दौरान सिर्फ मांसाहारी बल्कि कुछ शाकाहारी चीजों खानी भी वर्जित मानी जाती हैं. इन दिनों लौकी, खीरा, चना, जीरा और सरसों का साग नहीं खाने की मनाही होती ह
👉पितृपक्ष में किसी भी तरह का मांगलिक कार्य नहीं करनी चाहिए. शादी,मुंडन, सगाई और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य पितृपक्ष में वर्जित माने जाते हैं. पितृपक्ष के दौरान शोकाकुल का माहौल होता है इसलिए इन दिनों कोई भी शुभ कार्य करना अशुभ माना जाता है.
👉पितृपक्ष के दौरान पूरे 15 दिनों तक घर में सात्विक माहौल होना चाहिए. इस दौरान घर में मांसाहारी भोजन नहीं बनाना चाहिए. हो सके तो इन दिनों लहसुन और प्याज का सेवन भी नहीं करना चाहिए.
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