
दीपावली महापर्व: 4 नवंबर 2021 गुरुवार को कार्तिक अमावस्या को दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष दीपावली दिन गुरुवार को स्वाति नक्षत्र में मनाई जाएगी क्योंकि गुरुवार को स्वाति नक्षत्र होने से स्थिर योग बनता है और इस दिन यह योग पूरे दिन और रात रहेगा। अधिकतर व्यापारी और जन सामान्य स्थिर योग एवं लग्न को बहुत शुभ मानते हैं। ऐसा कहते हैं कि ऐसे पुण्य महायोग में अथवा लग्न में दीपावली पूजन करने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में लक्ष्मी स्थिर हो जाती है
व्यापारिक संस्थानों में दीवाली पूजन शुभ मुहूर्त:
-व्यापारिक प्रतिष्ठानों एवं कारखानों के लिए लक्ष्मी पूजन के लिए धनु लग्न बहुत ही श्रेष्ठ रहता है इस वर्ष यह प्रातः काल 9:51 से 11:50 तक रहेगा।
- मध्यान्ह 11:51 बजे से 13:30 बजे तक शुभ मुहूर्त हैं। (इस दिन 13:30 बजे से 15:00 बजे तक राहुकाल होने के कारण यह समय त्यागने योग्य है।)
- 15:01 बजे से 16:26 तक मीन लग्न और 16: 27 से 18: 06 बजे तक मेष लग्न एवं प्रदोष काल श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। इस समय में भी आप व्यापारिक संस्थानों में लक्ष्मी गणेश का पूजन कर सकते हैं।
रात्रि के लक्ष्मी पूजन के मुहूर्त: प्रदोष काल के बाद मध्य रात्रि तक गृहस्थी लोग अपने अपने घरों में महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लक्ष्मी गणेश जी का पूजन करते हैं। इसके लिए श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 18:02 बजे से 19:57 बजे तक वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) महालक्ष्मी पूजन के लिए बहुत ही श्रेष्ठ है लेकिन इस लग्न में राहु का गोचर लग्न में रहेगा इसलिए राहु की विशेष पूजा करने या कराने से यह मुहूर्त अच्छा हो जाएगा। इसके पश्चात 19:58 बजे 22:11 बजे तक मिथुन लग्न आएंगे। यह भी दीपावली पूजन के लिए उत्तम है और कर्क लग्न रात्रि 22:12 बजे से 24: 31बजे तक शुभ रहेंगे। रात्रि 24: 35 बजे से 2:53 बजे तक सिंह लग्न आएंगे। इसे निशीथ काल कहते हैं। इस मुहूर्त में तांत्रिक लोग अपनी सिद्धि करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को कोई मंत्र सिद्ध करना हो या इष्ट की पूजा करनी हो तो इसमें आप पूजा करने से तुरंत फल मिलता है।

दिवाली पूजन में ध्यान रखने योग्य बातें :
पूर्व या उत्तर पूर्व की तरफ मुह करके पूजा करे, पूजा करते समय आपके बैठने का आसन सफ़ेद हो तो अति उत्तम रहेगा। पुरुष सफेद वस्त्र पहने तथा स्त्री लाल या गुलाबी रंग के कपड़े पहने और बच्चो को पूजा के समय काले या नीले रंग छोड़कर कोई भी रंग पहना सकते है।
- घर में चौखट की पूजा कर ले, यथासंभव इत्र की महक से अपने घर को और चौखट को महका दे
- याद से नई झाड़ू को भी प्रणाम कर दे।।घर में बरकत देती है,,इस दिन लाई हुई नई झाड़ू।।
- दिवाली पूजन में कुम्भ की स्थापना अपने आप में बहुत शुभ है।।गेहू के ढेर पर या जौ के ढेर पर कुम्भ की स्थापना अपने आप लक्ष्मी योग बनाता है।।
- माँ लक्ष्मी जी को पटरे पर गंगा जल छिड़क कर लाल कपड़े पर गेहू से स्वस्तिक बना कर श्री यंत्र,,कुबेर यंत्र,,महालक्षमी यंत्र,,के साथ स्थान दे।
- सभी देवो को यथासंभव आदर से स्थान दे।।माँ लक्ष्मी जी के बाए तरफ गणपति जी को स्थान दे।।
- कुम्भ बाए हाथ और अग्नि यानि ज्योति दाए हाथ रखिए,,अपनी समर्थ अनुसार फूल,फल,मिठाई के साथ साथ माँ लक्ष्मी जी को घर की बनी खीर का भोग लगाए।।।
- और घर के मध्य स्थान को न भूले,,यहाँ गेहू के ढेर पर जल स्थापित करके थाली में स्वस्तिक बनाकर सरसो के तेल का दीपक जलाए जो सारी रात जले,,हज़ारो वास्तु दोषों का नाश होता है,,,,
- अपनी आस्था के दीपक जला कर अपने इष्ट देव को नमन करके,,अपनी जीवन में माँ लक्ष्मी जी को सादर बुला ले।।माँ लक्ष्मी जी को श्री सूक्तं ,,लक्ष्मी सूक्तम या माँ के किसी भी नाम से दीपावली के शुभ मुहूर्त मे याद करिए, विश्वास रखिए इस दिन लक्ष्मी माँ आती है।
लक्ष्मी-गणेश पूजन की विधि:
सर्वप्रथम दीपावली पूजन के शुभ समय को ध्यान रखते हुए दीपावली पूजन की सभी सामग्री तैयार कर लें। रोली, चावल, कलावा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, बताशे, मिष्ठान, इत्र, फल, पुष्प माला, गुलाब और कमल के फूल, सेव, अनार आदि फल, लक्ष्मी-गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति, श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, कमलगट्टे, लक्ष्मी, कौड़ी, श्रीफल, एकाक्षी नारियल आदि लक्ष्मीवर्धक वस्तुएं भी लक्ष्मी-गणेश जी के पूजन के समय रखें।
श्री गणेश, इंद्र ,वरुण ,कुबेर, नवग्रह देवताओं के पूजन के पश्चात महालक्ष्मी का आवाहन करें और पूजा करें। अपने घर में अथवा दुकान में बहीखाता, कंप्यूटर आदि का पूजन करें। एक थाली में 11 या 21 मिट्टी के दीए जलाएं और दीप मालिका की पूजा करके उन्हें द्वार, छत और घर के अन्य स्थानों पर रख दें। बाद में श्री गणेश और लक्ष्मी जी की आरती कर खीर-बताशे एवं मिष्ठान का भोग लगाएं और वह प्रसाद वितरण करें। धनतेरस को लाए हुए मिट्टी के लक्ष्मी-गणेश का पूजन करें और अगले दिन पुराने लक्ष्मी गणेश मंदिर से हटा कर उनका विसर्जन कर दें और नए लक्ष्मी गणेश मंदिर में स्थापित करें।
